स्वप्न में शल्य क्रिया : हृदय रोग लुप्त

एस के बहल, जुलाई 2011 English
1997 - 1998 में मुझे परिवार सहित गुरूजी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह मेरे एक मित्र के कहने पर संभव हुआ जो गुरूजी से आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात अत्यंत प्रभावित हुए थे।

इस अवधि में मेरी पत्नी, नीता, ह्रदय रोग से पीड़ित रही थी। मैं उसे हमारे पारिवारिक चिकित्सक के पास ले जा चुका था। उन्होंने ई सी जी और टी एम टी के साथ कुछ अन्य परीक्षण भी करवाने को कहा था। ई सी जी के परिणाम सही नहीं थे। टी एम टी में एक गतिशील पट्टे पर उसे चलना था किन्तु वह उस पर एक मिनट भी नहीं चल पाई थी; उसका रक्त चाप 2000 से ऊपर पहुँच गया था और चिकित्सक ने परीक्षण रोक दिया था। पारिवारिक चिकित्सक को बताने पर उन्होंने स्ट्रेस थैलियम परीक्षण करवाने को कहा। मैंने सीताराम भारतीय चिकित्सालय में परीक्षण के लिए नियुक्ति ले ली थी।

स्ट्रेस थैलियम परीक्षण से पूर्व हम गुरूजी से मिले और उनको पत्नी के स्वास्थ्य से अवगत कराया। गुरूजी ने बड़े ध्यान से पूरा वृत्तांत सुना और फिर मेरी पत्नी का हाथ पकड़ कर उसे बड़ी ज़ोर से झटका दिया। यह करने के पश्चात उन्होंने उसे तीन दिन तक निरंतर वक्ष के बाएँ भाग में 17 पान के पत्ते लगाने का परामर्श दिया। मेरी पत्नी को लगा जैसे उसका हाथ अपने जोड़े से निकल आया है। परन्तु, उसी दिन, वह तीव्र पीड़ा जो उसे सदा लगी रहती थी, एम्पायर एस्टेट में बैठे हुए ही काम होती लगने लगी।

मेरी पत्नी ने गुरूजी के परामर्श के अनुसार पान के पत्ते लगाये। उसी रात्रि को उसे स्वप्न आया कि गुरूजी ने उसके ह्रदय की शल्य क्रिया करके उसका उपचार कर दिया है। उसने बताया कि उस अवधि में उसे बहुत पसीना आया था और उसके बाद वह जग गयी थी। यह एक अद्भुत अनुभव था। उस शाम को गुरूजी से मिलने पर उन्होंने स्वप्न की ओर संकेत करते हुए कहा, "कल्याण हो गया।"

परन्तु हमने गुरूजी को थैलियम परीक्षण के बारे में नहीं बताया था जिसके लिए सीताराम भारतीय चिकित्सालय से समय भी ले लिया गया था। जब मेरी पत्नी परीक्षण के लिए गयी तो सबसे पहले ई सी जी लिया जो संतोषजनक था। उसके बाद उसने टी एम टी परीक्षण किया। चिकित्सक आश्चर्यचकित थे कि नौ मिनट पट्टे पर चलने के पश्चात भी उसका रक्त चाप सामान्य रहा। उत्सुकतावश उन्होंने मुझ से उसके लक्षणों के बारे में पूछा। जब मैंने उनको बताया कि ह्रदय की समस्या के कारण निरंतर पीड़ा रहती है तो उन्होंने आपस में एक दूसरे को विस्मित होकर देखा। उसके बाद हम घर वापिस आ गये।

तीसरे दिन जब हमें उसके परिणाम मिले तो वह सामान्य सीमाओं में थे और कोई अवरोध नहीं था। उसी समय मुझे गुरूजी से फ़ोन आया कि परिणाम सही हैं और क्या अब हम संतुष्ट थे। हम बहुत लज्जित हुए। उस समय से मेरी पत्नी को ह्रदय की कोई समस्या नहीं हुई है।

इसी प्रकार के अनेक संस्मरण हैं जिनसे सिद्ध होता है कि गुरूजी महाराज अद्भुत शक्तियों सहित ईश्वर के अवतार हैं। उनमें अपने अनुयायियों के लिए अपार प्रेम और दया है, जिनकी मानसिक और शारीरिक कष्टों से मुक्ति होती रहती है

गुरूजी की शरण प्राप्त कर और प्रतिदिन उनकी कृपा के पात्र बन कर हम अत्यंत भाग्यशाली हैं।

एस के बहल, दिल्ली

जुलाई 2011