मन और दृष्टि से सुदृढ़

शालिनी खेरा, मई 2011 English
गुरूजी परमात्मा हैं। वह ईश्वर हैं। उनके पास आने से पूर्व मैं अत्यंत निराशावादी प्रकृति की थी पर उनका आश्रय प्राप्त होने के बाद मैं बदल गयी हूँ। मुझे प्रतीत होता है कि मुझे सुरक्षा और शरण, दोनों मिले हुए हैं।

मेरे पति, बीमा जगत के एक प्रमुख व्यक्ति के पुत्र, को अत्यंत आश्चर्य हुआ जब गुरूजी ने उनके पिता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि उनके पिता, खेरा, बीमा समाज के एक प्रसिद्ध व्यक्ति हैं। गुरूजी के पास जाते रहने से मेरे पति की व्यापार सम्बंधित समस्याओं का निवारण होने लगा।

दो वर्ष पूर्व गुरूजी ने मुझे भी अपना आशीर्वाद दिया। मेरी समस्या अति विशिष्ट थी: मुझे अपनी आँखों के कोनों से दिखाई नहीं देता था। मैंने अनेक नेत्र चिकित्सकों के चक्कर काटे थे। मेरे दृष्टिपटल और अन्य परीक्षणों के सब परिणाम सामान्य आते थे। चिकित्सक उसका निदान नहीं कर पा रहे थे। जब मैंने गुरूजी को यह समस्या बतायी तो उन्होंने तांबे लोटा लाने के लिए कहा। जिस दिन से मैंने उसका जल पीना आरम्भ किया, मेरी दृष्टि सामान्य हो गयी।

नव जीवन दान

अकस्मात् मुझे मूर्छा का दौरे पड़ने लगे। मैं स्पाइन स्पेशलिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और ऑर्थोपैडिशन के पास गयी परन्तु कोई मेरी सहायता नहीं कर सका। चार मास तक निरर्थक विभिन्न विशेषज्ञों के पास जाने के पश्चात मैं तंग आ गयी। सब स्कैन और एम आर आई तक हो गए किन्तु समस्या बनी रही। मुझे उदासी ने घेर लिया और मैं अपनी शैय्या की होकर रह गई; मैं कुछ भी कर पाने में असमर्थ थी।

मैंने गुरूजी के पास जाकर कहा कि मैं रात को सो नहीं पाती हूँ और पूरे शरीर में कम्पन बनी रहती है। उन्होंने मुझे अपना आशीष देते हुए कहा कि मैं लंगर धीरे धीरे ग्रहण करूँ। उनकी दया से मैं शीघ्र ही स्वस्थ हो गयी। उसके उपरान्त जब मैं उनके पास गयी तो वह बोले कि उन्होंने मुझे नव जीवन प्रदान किया था।

मेरे पति को भी पीठ की गंभीर समस्या थी। वह कई महीनों से औषधियाँ ले रहे थे किन्तु उनका वेदना बढ़ती ही जा रहा थी। वह कई चिकित्सालयों में दिखला चुके थे - विमहन्स, इंडियन स्पाइनल इंजरीस सेंटर (मेरूदंड आघात केंद्र), रॉकलैंड आदि - किन्तु कोई चिकित्सक उनके रोग का निदान नहीं कर पाया था। वेदना इतनी अधिक थी कि कई माह से मेरे पति सो नहीं पाये थे।

मैंने गुरूजी को उनकी स्थिति से अवगत कराया। अगली बार जब मैं उनके दर्शन के लिए गयी तो गुरूजी ने उनके बारे में पूछा। मैंने उत्तर दिया कि पीड़ा अभी भी बनी हुई है। गुरूजी ने सब औषधियाँ बंद करके उनको हल्दी वाला दूध रात को देने के लिए कहा। जिस दिन से मेरे पति ने वह दूध लेना आरम्भ किया, उनके दर्द लुप्त हो गये। 31 जनवरी को जब हमने उनके दर्शन किये तो गुरूजी बोले कि उन्होंने हमें आशीर्वाद दिया है और अब यह समस्या कभी नहीं होगी।

उस दिन से मेरे पति को कोई पीड़ा नहीं हुई है। उन्हें लगता है कि गुरूजी ने उन्हें अद्भुत शक्ति प्रदान की है। जनवरी 2006 में जब वह अमरीका गये तो मुझे चिंता लगी हुई थी कि फिर से उनके दर्द शुरू हो जायेंगे। किन्तु गुरूजी की कृपा से ऐसा कुछ नहीं हुआ। गुरूजी ने उनका उपचार कर दिया था।

जब से मैं गुरूजी के पास आई हूँ मेरा जीवन परिवर्तित हो गया है। गुरूजी हर कदम पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं। आपको उनको ह्रदय से याद करना है और वह आपके पास आ जाते हैं। हम भाग्यशाली हैं कि गुरूजी हमें मिले हैं।

शालिनी खेरा, दिल्ली

मई 2011