प्रति पग रक्षा

पुनीत सिंह, जुलाई 2007 English
'तेरे कवन कवन गुण कहे कहे गँवा, तू साहिब गुनी निधाना'

मेरे माता पिता ने जून - जुलाई 2001 से गुरूजी के पास आना आरम्भ किया था और उसके पश्चात जीवन में परिवर्तन होने लगा। मैं जर्मनी में रहकर प्रसन्न नहीं था। गुरूजी की दया से शीघ्र ही मुझे सात मॉस के लिए वापिस भारत पोस्ट कर दिया गया। उस समय मेरी बहन के वैवाहिक जीवन में बहुत उथल पुथल हो रही थी। हमने उसकी जन्मपत्री अनेक ज्योतिषियों को दिखायी थी और सबने उसके वैवाहिक जीवन में सुख का अभाव बताया था। किन्तु गुरु कृपा से सब समस्याएँ हल हो गयीं।

2000 में मैं भी अत्यंत कठिन परिस्थितियों से गुज़रा हूँ किन्तु उनकी दया से मैं उनका सामना भी कर पाया हूँ। एक बार यूरोप में मेरा बैग - जिसमें मेरा पासपोर्ट, क्रेडिट कार्ड और चाबियाँ थीं - खो गया। मैंने गुरूजी का ध्यान किया और थोड़ी ही देर में विमान कर्मचारियों ने बताया कि वह मिल गया है। उसमें से कुछ भी निकाला नहीं गया था - सब सामान सुरक्षित था।

2006 में मैं पाकिस्तान जाकर वहाँ के सब गुरुद्वारों के दर्शन करना चाहता था, परन्तु मुझे वीसा नहीं मिल रहा था। अचानक ही अंतिम समय पर, जब मैंने सब आशाएँ छोड़ दीं थीं, वीसा मिल गया। इससे मैं रावलपिंडी ज़िले में स्थित गुरुद्वारा पंजा साहिब भी जा सका, यद्यपि मेरा वीसा केवल लाहौर ज़िले के लिए था।

पिछले दो वर्ष सिंगापुर में रहते हुए अनेक कार्य सम्बंधित समस्याएँ उठी हैं। मैंने अपने सहकर्मियों के विरोध का भी सामना किया। परन्तु गुरुकृपा से वह सब सुलझ गयीं। गुरूजी की दया से मुझे एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालय से एम बी ए करने का संयोग प्राप्त हुआ - वहाँ पर मैंने कभी प्रवेश करने की आशा भी नहीं की थी।

एक दिन मेरी भयंकर दुर्घटना होते होते बची। मेरा एक पैर बस के पहिये के नीचे आने वाला था। घर पहुँचने पर मैंने देखा कि गुरूजी के चित्र का फ्रेम चटक गया था किन्तु उनका चित्र सुरक्षित था। तब मुझे आभास हुआ कि उन्होंने ही दुर्घटना से रक्षा की थी।

मेरे पिता को एक प्राणघातक ट्यूमर हो गया था। उनको कीमोथेरेपी और सर्जरी करवानी पड़ी और उपचार की अवधि में अभूतपूर्व सुधार हुआ। गुरूजी ने उन्हें नवजीवन दिया है।

जीवन के हर पग पर उन्होंने हमारी रक्षा की है। यदि मैं उनके सब चमत्कारों का वर्णन करने लगूँ तो शब्द और पृष्ठ काम पड़ जायेंगे। उन्होंने मेरे माता पिता और बहन का ही नहीं, हमारे अन्य रिश्तेदारों का भी ध्यान रखा है। दो वर्ष पूर्व हमने उनसे चंडीगढ़ स्थित एक रिश्तेदार के लिए विनती की थी, जिसकी दुर्घटना हो गयी थी। गुरूजी को सब ज्ञात है और वह उचित समय पर कामना पूर्ण करते हैं - आशापूर्ति करने के उचित समय का ज्ञान उनको ही है। वह सदा हमारे लिए हमारे साथ हैं। मैं गुरूजी की असीमित कृपा और संरक्षण देने के लिए प्रभु का धन्यवाद करता हूँ।

पुनीत सिंह, गुडगाँव

जुलाई 2007