शोक संतप्त परिवार का उद्धार

प्रदीप सूद, जुलाई 2007 English
मेरी पत्नी के एक सम्बन्धी, जो पंजाब के कपूरथला ज़िला में स्थित सिधवान दोना गाँव में रहते हैं, दो बेटियों के बाद जुड़वा बेटों से धन्य हुए। पर चार - पाँच दिन बाद ही दोनों की मृत्यु हो गई। पूरा परिवार स्तब्ध रह गया। माँ डिप्रेशन में चली गई और परिवार का व्यापार डूबने लगा।

एक दिन इस व्यक्ति ने मुझे फ़ोन किया तो मैंने उन्हें गुरूजी के दर्शन करने के लिए कहा। सत्संग सुन कर उनके मन में गुरूजी के आशिर्वाद की कामना जागृत हुई। एम्पायर एस्टेट से निकलकर जब वह आये, तो इतनी पाज़िटिव एनर्जी से भरे हुए दिख रहे थे, उनकी आँखों में आँसू थे और उन्होनें कहा कि उन्होनें भगवान के दर्शन किये हैं। फिर वह अपने गाँव वापिस चले गए।

आज, उनके बिना कहे ही, वह एक स्वस्थ्य पुत्र के पिता हैं। जब वह अगली बार गुरूजी के पास आये तो गुरूजी ने उनको यह कहकर जाने के लिए कहा कि उनकी मनोकामना पूर्ण हो गई थी। गुरूजी ने उनसे यह पहली बार बात की थी।

गुरूजी की ऐसी कृपा है। उन्होनें परिवार को न केवल एक पुत्र दिया, उसे गहरे दु:ख और शोक से भी बाहर निकाला। इश्वर की दया की कोई सीमा नहीं होती। एक शबद के अनुसार, कृपा दृष्टि तो सब पर होती है परन्तु वही इसे ग्रहण कर पाते हैं जो नम्र स्वभाव के होते हैं, जैसे ऊँचे पर्वतों से जल बह कर नीचे घाटियों में आ जाता है और वहीँ ठहर जाता है।

प्रदीप सूद, कपूरथला

जुलाई 2007