यमदूतों से मुक्ति

नरेश खंडेलवाल, गुडगाँव, जुलाई 2007 English
श्री नरेश खंडेलवाल की पत्नी, जो तीस वर्ष से कुछ अधिक की रही होंगी, को ज्वर हो गया था। पता लगा कि उसे डेंगू ज्वर था और उसके गुर्दे प्रभावित हुए थे। गुडगाँव में चिकित्सकों ने उसका उपचार करने से मना कर दिया था क्योंकि उसके प्लेट्लिट की मात्रा केवल 9000 थी। जैसे कि यह अपर्याप्त था, मँगलवार को एक रक्त वाहिनी फट गई और रक्त प्रवाह को रोक पाने में असमर्थ चिकत्सकों ने उसे चिकित्सालय से मुक्त कर दिया। फिर उसे नोएडा के मेक्स चिकित्सालय में प्रविष्ट कराया गया।

नरेश के भाई गुरूजी के भक्त थे। यह घटनाएँ देखकर वह और उनकी पत्नी अत्यंत परेशान हुए और उन्होंने गुरूजी के एक अन्य अनुयायी को फोन किया और पूछा कि क्या वह उस दिन, मँगलवार को ही गुरूजी के दर्शन कर उनको इस समस्या से अवगत करा सकते हैं? उन्हें बताया गया कि गुरूजी तो स्वयं ईश्वर हैं; वह अपनी शरण में आये हुए किसी को भी कष्ट नहीं होने देंगे।

इस अवधि में मेक्स के चिकित्सकों ने भी हाथ खड़े कर दिए। बृहस्पतिवार को नरेश गुरूजी के पास गए। जैसे वह गुरूजी के चरण स्पर्श कर रहे थे, वह अपने को रोक नहीं पाये और उन्होंने गुरूजी को बता दिया कि उनकी पत्नी डेंगू से पीड़ित है। गुरूजी का उत्तर स्वयं में सांत्वना देने वाला था, "डेंगू …… डेंगू कि होंदा है? चल, जा कुछ नहीं होया उसनू।"

नरेश जैसे ही चिकित्सालय वापिस पहुँचे, उनकी पत्नी के प्लेट्लिट की संख्या प्रत्येक परीक्षण में ऊपर बढ़नी आरम्भ हो गयी - 12000 से 30000, 50000, 100000, 150000 आदि। गुरूजी के आशीर्वाद से उसके शरीर में उपचार की प्रतिक्रिया प्रारम्भ हो गई थी।

चिकित्सालय में ही एक रात को वह चीखती हुई उठी। उसके आसपास सब ने पूछा कि क्या हुआ। उसने स्वप्न देखा था कि तीन काले मनुष्य उसे खींच कर ले जा रहे थे और वह बचाने के लिए पुकार रही थी। किन्तु उसके सब ओर खड़े हुए समूह में से कोई कुछ नहीं कर पा रहा था। फिर उसने गुरूजी को पुकारा। गुरूजी आये, यमदूत चले गये और वह बच गई। यह स्वप्न उसने दो बार देखा और उसे प्रतीत होने लगा कि उसे गुरूजी ने ही जीवन दान दिया है। केवल वह ही ऐसा कर सकते हैं। एक सप्ताह में उसे चिकित्सालय से मुक्ति मिल गयी और फिर उसके गुर्दे ठीक करने के लिए उसे डायलिसिस पर डाला गया। आज वह माँ, पत्नी और बेटी - तीनों की भूमिका निभा रही है। गुरूजी ने यमदूतों को वापिस भेज दिया। क्या कोई और ऐसा कर सकता है?

नरेश खंडेलवाल, गुडगाँव, द्वारा कथित

जुलाई 2007