गुरूजी के आदेश से

ज्योति गुप्ता, जुलाई 2007 English
मैं एक ऐसे अज्ञात रोग से पीड़ित थी जिसका इलाज नहीं हो पा रहा था। सभी बड़े हस्पतालों - इन्द्रप्रस्थ, अपोलो, मैक्स, एम्स आदि में मेरे अनेक परीक्षण हुए थे पर डाक्टर कुछ समझ नहीं पा रहे थे।

मैंने नियमित रूप से गुरूजी के पास आना शुरू किया। गुरूजी ने मुझे बड़े मंदिर में सेवा करने को कहा। मैंने उनकी आज्ञा का पालन किया। चार-पाँच दिन बाद जब मैं डाक्टर के पास गई तो उन्हें मेरी बिमारी का पता चल गया। वह एक गंभीर किस्म का खून का इन्फेक्शन था और डाक्टर ने मुझे चेतावनी दी कि इसका इलाज लम्बा और पीड़ादायक होगा।

लेकिन गुरूजी को यह स्वीकार नहीं था कि उनके भक्त को इतने कष्ट उठाने पड़ें। मुझे हस्पताल में भर्ती किया गया और मेरा इलाज शुरू हुआ लेकिन चार दिन बाद ही डाक्टर ने मुझे डिस्चार्ज भी कर दिया। मुझे दवाईयाँ लेने को कहा गया। अब मैं बिल्कुल स्वस्थ्य हूँ।

ऐसी कृपा असाधारण नहीं है। जब भी गुरूजी हमें कुछ आदेश दें, हमें उसका पालन ज़रूर करना चाहिए - उसका तर्क नहीं ढूंढना चाहिए। उनका आदेश भक्त के लिए उनका आशीर्वाद है और वह उसके लाभ के लिए है। गुरूजी को धन, उपहार या खुशामद करने वाले कार्य पसंद नहीं हैं। वह केवल सच्चे प्रेम से प्रसन्न होते हैं। ऐसा प्रेम जिसमें कोई आशा ना हो, कोई शर्त ना हो, कोई प्रतिबन्ध ना हो, और जो गुरूजी का कहा स्वीकार करे। गुरूजी बहुत प्यार देते हैं; उनको केवल प्यार से स्मरण करने की आवश्यकता है।

ज्योति गुप्ता, नॉएडा

जुलाई 2007