चरण स्पर्श पर्याप्त है

दीपा सिंह, जुलाई 2007 English
चंडीगढ़ के मुख्य पर्यवेक्षक, श्री गिल ने हमें गुरूजी के पास फरवरी 1999 में दर्शन हेतु भेजा। मैं तुरन्त गुरूजी द्वारा अनुगृहित हुई। मेरे पेट और पैर में भयंकर वेदना थी। औषधियों का कोई प्रभाव नहीं हो रहा था: मुझे बहुत कष्ट था। गुरूजी के चरण स्पर्श करते ही मेरे शरीर में उपचारात्मक प्रवाह हुआ। उनके हाथों से प्रसाद ग्रहण कर मेरा रोग विलीन हो गया। शीघ्र ही मैं उनके निर्देशानुसार प्रति पखवाड़े उनके दर्शन करने में समर्थ थी।

मेरा पुत्र गुरूजी के प्रति आक्रामक और अवज्ञाकारी था। उसे मैं गुरूजी के पास लेकर आई। उनके ही आशीष से वह परिवर्तित हुआ और फिर उसे सदा उनके आशीर्वाद की प्रतीक्षा रहने लगी। उसकी दुर्घटना के समय कार तो क्षतिग्रस्त हुई पर गुरुकृपा से वह बच गया।

एक बार गुरूजी के निर्देश पर हम चंडीगढ़ एक विवाह में गये। वहां गुरूजी ने हमें श्री गिल के घर जाने के लिए कहा, जहाँ वह उसी दिन कुछ देर के लिए ठहरे थे। वह कक्ष उनकी सुगंध से भरा हुआ था और हमने जी भर कर उनके चित्र द्वारा उनके दर्शन किये। गुरूजी के मस्तक पर गुरु नानक देव की मुखाकृति स्पष्ट दिखाई दी। एक अन्य अवसर पर मुझे गुरूजी के ग्लास में शिव के नाग देवता दिखाई दिये।

सेवानिवृत्ति के कष्ट

2001 में मेरे पति को उनके कार्यालय में उनके कनिष्ट और वरिष्ट अधिकारी व्यथित कर रहे थे। शीघ्र ही गुरूजी की दया से वह सब अधिकारी स्थानांतरित हो गये।

2003 में जब वह सेवा से निवृत होने वाले थे, पुनः कष्ट बढ़ गये। उनके कुछ सहकर्मी उनको चैन से सेवानिवृत नहीं होने दे रहे थे। उन पर झूठे आक्षेप लगा दिये थे। इसके कारण वह अत्यधिक दुखी थे। पेंशन और अन्य अनेक भत्तों का मिलना भी संदेहास्पद हो गया था। उन्होंने गुरूजी से प्रार्थना करी और सब आरोप हटा दिये गये और उनको समस्त लाभ प्राप्त हुए।

संतान पर कृपा

मेरी बेटी पढ़ने में कमजोर थी और आगे पढ़ना नहीं चाह रही थी। किन्तु गुरूजी का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद उसने क़ानून का पाठ्यक्रम आरम्भ किया और प्रथम वर्ष में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुई। मेरा पुत्र इलेक्ट्रोनिक अभियंता है और उसकी पत्नी एक कंप्यूटर कंपनी में कार्यरत है। वहां पर कार्य शुरू करते ही वह गुरूजी की दया से प्रशिक्षण के लिए अमरीका गया और उसे दस वर्ष का वीसा भी मिल गया।

हमारे परिवार पर गुरूजी की कृपा बनी हुई है। यदि हम गुरूजी के पास नहीं आ पाते हैं तो वह हमें स्वप्न में दर्शन देते हैं।

दीपा सिंह, दिल्ली

जुलाई 2007