कृपालु गुरूजी का आश्रय

विंग कमांडर (सेवा निवृत्त) बी लखनपाल, जुलाई 2007 English
20 वर्ष पूर्व जब मैं आगरा स्थित वायुसेना छावनी में विमान चालक था, मेरे वार्षिक चिकित्सा परीक्षणों में डाक्टर्स को मेरे ई सी जी में कुछ प्रतिकूल लक्षण मिले। मेरी बहन के पति, ब्रिगेडियर दत्ता उस समय जलंधर में कार्यरत थे। वह अपने परिवार सहित गुरूजी के पास जाया करते थे। मेरी बहन ने गुरूजी के दर्शन करने का आग्रह किया। दर्शन के पश्चात गुरूजी मुझे एक कमरे में ले गए और मेरे ह्रदय पर एक चमच्च रखकर बोले, "तेरा कल्याण हो गया।"

जब मैं आगरा लौटा तो पुन: मेरा ई सी जी किया गया। गुरूजी की कृपा से सब सामान्य आया। अगले दिन मेरी पत्नी जलंधर जा रही थी। मैंने उसे गुरूजी के दर्शन करने के लिए कहा तो उसने अनिच्छा व्यक्त की। जब वह गुरूजी से मिली तो उन्होनें उसे कहा कि आगरा में तो वह उनके पास नहीं आना चाह रही थी। वह आश्चर्यचकित रह गई। जब वह उनसे चलने की आज्ञा ले रही थी तो उन्होनें कहा कि जम्मू से वह फिर उनके दर्शन के लिए आयेगी। मेरी पत्नी ने कहा कि उसकी वहाँ से सीधे आगरा जाने की योजना है। गुरूजी ने फिर कहा कि आगरा लौटने से पहले वह जलंधर हो कर जायेगी।

जब मेरी पत्नी जलंधर पहुँची तो उसने अपनी माँ को हर्पीज़ (एक त्वचा रोग) से पीड़ित पाया जिसका कोई इलाज नहीं है। उसने अपने माता पिता को गुरूजी के बारे में बताया था। उसके पिता ने आग्रह किया कि वह अपनी माँ को लेकर गुरूजी के पास जलंधर जाये। अगले दिन मेरी पत्नी पुन: गुरूजी के चरणों में थी - जैसा उन्होनें कहा था। गुरूजी ने मेरी सास को अपना आशीष दिया और कुछ ही दिनों में वह स्वस्थ हो गयीं।

वायुसेना में होने के कारण मैं अनेक स्थानों में रहा और अगले 20 वर्षों तक गुरूजी के दर्शन नहीं कर पाया। लेकिन हमारे ह्रदय में गुरूजी के प्रति आस्था सदा बनी रही।

अगस्त 2005 में चिकित्सकों ने बताया कि मेरी पत्नी के दोनों गुर्दे शीघ्र ही काम करना बंद कर देंगे। हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। किसी ने बताया कि गुरूजी अब दिल्ली में हैं। हम में आशा जागृत हुई कि उनकी कृपा से सब ठीक हो जाएगा। अत: 20 वर्षों के पश्चात जब हम गुरूजी के पास पहुँचे तो उन्होनें मुझे मेरे नाम से संबोधित किया। मैं दंग रह गया। उन्होनें कहा कि उन्हें मेरी पत्नी की स्थिति का ज्ञान है और हमें ताम्बे का लोटा लाने के लिए कहा। अगले दिन जब हम लोटा लेकर पहुँचे तो उन्होनें मेरी पत्नी को आशीर्वाद देते हुए कहा, "तेरा कल्याण हो गया।"

उस दिन से वह स्वस्थ हो रही है। अगस्त 2004 में उसकी क्रितेनिन की मात्रा जो अगस्त में 7.2 थी, वो घट कर जून में 5.1 हो गई थी. हमें पता है कि यह गुरूजी की कृपा से ही संभव हो रहा है। मुझे विश्वास है कि हमें सदा उनका आशीर्वाद मिलता रहेगा.

विंग कमांडर (सेवा निवृत्त) बी लखनपाल, आगरा

जुलाई 2007