इश्वर दूत

एक भक्त, जुलाई 2007 English
किसी भी स्पष्ट कारण के अभाव में जब मेरा कॉलेज जाने वाला बेटा डिप्रेशन में चला गया तो मुझे बहुत दुःख हुआ। मैं चूर-चूर हो गई थी। हमने कई विशेषज्ञों की राय ली और फिर मुझे गुरूजी की याद आई जिनके बारे में मैंने अपनी बेटी से सुना था। मेरी बेटी की एक सहेली का परिवार गुरूजी के पास जाते थे। उस सहेली की माँ हमारा गुरूजी से परिचय कराने के लिए मान गईं। उन्होनें हमें बार-बार यह आश्वासन दिया की सबकुछ पहले जैसा हो जाएगा और मेरे बेटे का एक साल व्यर्थ भी नहीं जाएगा; गुरूजी सब ठीक कर देंगे। मैं तो अपने बेटे को स्वस्थ्य देखना चाहती थी, कॉलेज में एक साल का नुकसान होना उस वक्त हमारे लिए मायने नहीं रखता था।

जब हमनें गुरूजी के पहली बार दर्शन किये तो वे बहुत दयालु और ध्यान रखने वाले प्रतीत हुए। जब उन्होंने कहा की सब ठीक हो जाएगा तो मैं निश्चिन्त हो गई। गुरूजी की कृपा से मेरे बेटे की हालत में धीरे-धीरे लेकिन नियमित रूप से सुधार होना शुरू हुआ। चिकित्सकों की सलाह के विरूद्ध मेरे बेटे ने निर्धारित समय पर अपनी आधी परीक्षाएँ दीं। उसके कॉलेज के अधिकारियों ने उसे एक महीने के बाद शेष परीक्षाएँ देने की आज्ञा भी दे दी। फलस्वरूप वह सब में अच्छे नंबर लेकर पास हुआ।

परमात्मा और गुरूजी की कृपा से मेरा बेटा एक महीने में पूरी तरह से स्वस्थ्य हो गया। अब वह खुशी-खुशी होस्टल में रह रहा है और अपनी पढ़ाई कर रहा है। उसकी डिप्रेशन की अवस्था अब एक बुरे सपने की तरह लगती है।

गुरूजी से मिलने के बाद मुझे लगता है की मेरे पूरे परिवार को गुरूजी का आशीर्वाद मिला है और हम बहुत सुरक्षित महसूस करते हैं। मैं गुरूजी की कृपा के लिए सदा ही कृतज्ञ रहूँगी। वह वास्तव में इश्वर के दूत हैं।

एक भक्त

जुलाई 2007