गुरूजी की कृपा से नया किराए का घर और नई नौकरी का मिलना

एक भक्त, अगस्त 2015 English
मैं अमेरीका में बसा हुआँ हूँ, जबकि मेरी मां दिल्ली में रहती हैं। मेरी मां को गुरूजी के बारे में उनकी सहेलियों से पता चला और वह बड़े मंदिर में गुरूजी के दर्शन कर आयी। मेरी मां ने मुझे फ़ोन पर गुरूजी के बारे में और बड़े मंदिर में गुरूजी के दर्शन के बारे में बताया। उसने गुरूजी के चमत्कारों के बारे में भी बताया और बताया कि बड़े मंदिर जाकर गुरूजी के दर्शन कर के उसे बहुत शांति और स्थिरता का अनुभव हुआ। मां ने मुझे गुरूजी के बारे में इंटरनेट पर देखने को भी कहा। यह लगभग अक्टूबर 2014 की बात है।

मैंने इंटरनेट पर गुरूजी के बारे में देखा। मेरी बचपन से ही आध्यात्मिकता और ध्यान की ओर रूचि थी। मैंने पहले भी बहुत से धार्मिक लोगो पर विश्वास किया है परन्तु कभी भी ना तो सुखद अनुभव ही हुआ और ना ही कभी परिपूर्ण होने की भावना आयी। अब मैंने 'लाइट ऑफ़ डिविनिटी' पढ़ना शुरू किया और मैं पूरी तरह से इस में तल्लीन हो गया। शीघ्र ही मैं अपने आप को सकारात्मक और शांत महसूस करने लगा। यह गुरूजी के चमत्कारों को पढ़ के नहीं था बल्कि यह गुरूजी के खिंचाव के कारण था। मैं गुरूजी के बारे में पढ़ते पढ़ते धीरे धीरे शांति और प्रसन्ता का अनुभव करने लगा।

मार्च 2015 में मुझे गुरूजी की उपस्थिति और आशीर्वाद का एहसास होना आरम्भ हो गया। मैं पिछले तीन माहं से किराए के लिए घर ढूंढ रहा था। मैं एक और फलैट के सामने खड़ा था। मैंने अपने फ़ोन में गुरूजी की फोटो देखी और यह सोचते हुए कि यहां तो फ्लैट मिल ही जायेगा, अंदर चला गया। गुरूजी की कृपा से मेरा काम हो गया।

एक मांह पश्चात मैंने नयी नौकरी की तलाश आरम्भ की। मैंने नौकरी की तलाश में कठोर परिश्रम किया लेकिन काम नहीं बन रहा था। जून 2015 में, गुरूजी की कृपा से मुझे दो कंपनियों से ऑफर आयी। मेरे मन में उलझन आ गयी की कौन सी कंपनी में नौकरी करूँ। मैंने गुरूजी से प्रार्थना की कि मुझे स्पष्ट उत्तर चाहिए। मैंने कुछ लोगों से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया। शीघ्र ही मुझे उत्तर मिल गया और मैंने नयी कंपनी में नौकरी कर ली।

मैं सारी संगत का धन्यवाद करता हूँ कि वह अपने सत्संग आदान प्रदान करते है। मुझे अपने दिन प्रतिदिन की समस्याओं के हल संगत के पावन अनुभवों से मिल जातें हैं। जय गुरूजी

एक भक्त

अगस्त 2015